Thursday, July 28, 2011

काबलियत और आत्मसम्मान...


साथियों अब कुछ करना होगा........
मेरे प्रदेश राजस्थान के एक शहर उदयपुर की एक रिपोर्ट ने मुझे बेहद व्यथित और चिंतित कर दिया और जहां तक मैं सोचता हूँ, इस जानकारी के बाद आप और सभी युवा साथी भी चिंतित हो जाएँगे।

लाइव इंडिया के राजस्थान ब्यूरो चीफ़ राजेश असनानी की एक रिपोर्ट के अनुसार उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में चपरासी की 15 वेकेंसीज निकाली गई जिनका काम एक टेबल से दूसरे टेबल पर फाइलें ले जाना, आने-जाने वाले लोगों को पानी पिलाना और अन्दर बैठे साहब के हुक्म की तामील करना है..... आप सब को यह जानकार आश्चर्य होगा कि इन 15 पदों के लिए लगभग 3500 आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनमें से 50 आवेदन उच्च शिक्षा प्राप्त एमबीए, एमफिल, पीएचडी किए हुए छात्रों के मिले हैं.....

हमारे लिए यह एक अलार्मिंग सिचुएशन है कि इतनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी हमारे युवा साथी चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कोर्पोरेट सेक्टर में बढ़ता हुआ शोषण, सरकारी जॉब सीक्योरिटी, बढा हुआ छठा वेतनमान और भविष्य में मिलने वाले promotions और pension को आवेदन का कारण बताया।

मैं ये जानना चाहता हूँ कि इतनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी अगर हमें चपरासी के पद पर नौकरी मिलती है तो क्या हम शिक्षा और उस पद के प्रति न्याय कर पाएंगे......?
क्या सम्बंधित अधिकारी जिसके कि हम चपरासी बनेंगे वो हमें चपरासी समझ पाएगा.....?
यदि नहीं तो अपने आत्मसम्मान के साथ अन्याय क्यों......?
साथियों कब तक हम सरकारी नौकरी के भरोसे रहेंगे और अपनी शिक्षा और आत्मसम्मान के साथ समझौता करेंगे......?

अपनी क्षमता और काबिलियत को ध्यान में रखते हुए हमें खुद को पहल करते हुए अवसर उत्पन्न करने होंगे जिनसे कि और लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करवाए जा सकें।

मैं मानता हूँ कि हम सभी टाटा, बिडला या अम्बानी जैसे और भी बड़े घरानों से नहीं हैं लेकिन पूँजी ही सब कुछ हो ऐसा नहीं है........ हमें शुरुआत करनी पड़ेगी, अपने comfort zone से बाहर आना होगा और रिस्क उठानी होगी ताकि हम अपने साथ-साथ अपने साथियों के लिए और आने वाले कल के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकें......
जय युवा...
जय भारत...









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