Monday, April 25, 2011

गोद में ही दम तोड़ा....

धरती पर भगवान् समझा जाने वाला डॉक्टर, जिसने इस पेशे में कदम रखते समय ये शपथ ली थी कि मैं मेरे कर्तव्य का निर्वहन ईमानदारी से करूँगा और जरुरत के समय हर इंसान के काम आऊंगा वही आज अपने स्वार्थों की पूर्ती के लिए धरती के भगवान् से यमदूत बनने का काम कर रहा है....!

हाल ही में प्रदेश के सीकर जिले में डॉक्टरों द्वारा घोषित सामूहिक अवकाश वाले दिन एक बालिका ने समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने पर अपने भाई की गोद में ही दम तोड़ दिया। इंसानियत के शर्मसार होने की इससे बड़ी और क्या घटना होगी.....?

डॉक्टरों का अपनी मांगों को लेकर आए दिन चिकित्सा सुविधाएं ठप्प कर देना, हड़ताल करना आज आम बात हो गई है। मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि आम जनता को तकलीफ देकर अपनी मांगे मनवाने का ये कौनसा तरीका है.....?



उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक यह कह चुके हैं कि चिकित्सा सुविधाएं अति आवश्यक सेवाओं में आती हैं और उनमें व्यवधान या रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी, उसके बावजूद भी लगातार ऐसा हो रहा है......

लगता है इस कलयुग में स्वयं भगवान् को धरती पर अवतार लेकर इस डॉक्टर रूपी भगवान् को समझाना होगा ताकि इंसानियत का दर्द और अपनों से बिछड़ने की पीड़ा ये महसूस कर सके......




अब आप सभी से यह जानना चाहता हूँ कि कब तक आम आदमी इस व्यवस्था की भेंट चढ़ता रहेगा.......?

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