Friday, March 18, 2011

अब जाट भी चले गुर्जरों की राह......



पिछले दिनों हुए राजस्थान के गुर्जर आरक्षण आन्दोलन में आन्दोलनकारियों द्वारा रेलमार्ग को अवरुद्ध किये जाने से देशभर को हुए नुकसान और आम जन को हुई बेहद परेशानी को हम अभी पूरी तरह भुला भी नहीं पाए हैं कि उत्तरप्रदेश और हरियाणा के जाटों ने आरक्षण की मांग करते हुए फिर से राजधानी से जुड़ने वाले देश के दूसरे हिस्सों को अवरुद्ध कर दिया है....

यहाँ यह कहना गलत नहीं होगा कि राजस्थान के गुर्जरों ने जिस प्रकार से आन्दोलन के चलते रेल मार्ग को अवरुद्ध कर जो उदाहरण प्रस्तुत किया...,लगता है देश के बाकी वर्ग भी आन्दोलन के लिए इसी प्रक्रिया को अपना रहे हैं।

होली जैसे बड़े त्यौहार पर आम आदमी जो रेल मार्ग द्वारा अपने गाँव, अपने प्रदेश, अपने परिवार जनों के पास जाना चाहता है वो आज कितना बेबस और लाचार है इसकी कल्पना शायद ये आन्दोलनकारी नहीं कर पा रहे हैं.......

आन्दोलन करना एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और अपनी मांगें मनवाने का एक तरीका है, लेकिन आन्दोलन करने के साथ-साथ ही सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आन्दोलन से आम जन प्रभावित न हो और उद्धेश्यपूर्ति हेतु जिस भी व्यवस्था का ध्यान आकृष्ट करना है, चाहे वो व्यवस्थापिका हो, कार्यपालिका हो या फिर न्यायपालिका हो, वहीं तक सीमित रहे।

बड़े दुःख की बात है कि अपनी मांगे मनवाने के लिए हमारे साथी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि रेलवे ट्रेक रोकने से, राष्ट्रीय राजमार्गों को रोकने से, बाजारों को बंद करवाने से और स्कूलों, चिकित्सालयों आदि सरकारी संस्थानों को बंद करवाने से कोई फलदायक नतीजा नहीं आएगा, बल्कि आम जन में जाति विशेष के लिए रोष उत्पन्न हो जाएगा............... आन्दोलनकारियों को यह सोचना चाहिए कि ऐसा सब करने से आम जनता कितनी ज्यादा प्रभावित हो रही है.........! अपना नियमित जीवन भी नहीं जी पा रही है और ये स्वयं भी उसी समाज का हिस्सा हैं, जिसमें बाकी के लोग भी रहते हैं, कहीं ऐसा न हो की आने वाले भविष्य में समाज के अन्य वर्ग इनके साथ सामाजिक सामंजस्य नहीं बिठा पाएं..............!

आन्दोलनकारियों और नेतृत्वकर्ताओं से आम जन यह जानना चाहता है कि........

रेलवे ट्रेक रोकना कहाँ तक उचित है........?
राजमार्गों को रोकना कहाँ तक उचित है.......?
आवागमन के और यातायात के साधनों को रोकना कहाँ तक उचित है.......?
सरकारी संपत्ति, जो कि हमारे ही पैसे से बनी है को नुकसान पहुचाना कहाँ तक उचित है........?
आम आदमी की दिनचर्या को रोक देना कहाँ तक उचित है........?
युवा छात्र-छात्राएं, जो कि दिन-रात मेहनत करके भविष्य निर्माण में लगे हुए है, उनका इस वजह से परीक्षाएं नहीं दे पाना कहाँ तक उचित है.........?

ऐसे और भी बहुत सारे सवाल हैं, जिनका जवाब आम जनता चाहती है और कहती है कि आप भी तो हमारे ही साथी हो........!

मेरी आन्दोलनकारी और नेतृत्वकर्ताओं से करबद्ध गुजारिश है कि हम समाज के बाकी सभी लोग उनके साथी हैं और चाहते हैं कि उनकी जायज मांग पूरी हो, जिसे कि क़ानून और सरकार मान्यता दे किन्तु हमें होने वाली परेशानियों का भी ध्यान रखा जाए......

जय हिंद.....
जय भारत.....

2 comments:

  1. HAAN JI !!!
    GUJJAR NE TO APNI MAANGE PURI KARVAI TO
    """JAAAT """
    PICHHE KAISE RAHEIN BHAI ???
    PEHLE GUJJARONN NE WINTER BREAK KHRAB KIYA MAASSOM BAHHON KAA ---
    AB """"" JAAT... """"
    ""HOLi """"
    khrab karenge....
    hamari govt kiii to lag gai waattttt
    abi to SCS ETC KO RESERVTNN KE LIYE AGREEMNT DIYA AB JATTON KAA AGREEMNT BII DENA PADEGAA..... ............
    VAISE EK BAAT TO KAHNII PADHEGII KI -->
    CHHAHE
    "" PARLIAMENT MEIN HO HATAPAI --
    YAA PHIR JAATOONNNN KI HO LADAI
    PUBLICITY SABKO BHAATI HAI
    BHAI """
    AFTR ALLL """ RIGHT "" NAAM KII BHI TO KOI CHEEZ HAI NAA................JI

    ReplyDelete
  2. बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
    यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
    मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

    ReplyDelete