Sunday, February 27, 2011

योग में छुपी महत्वाकांक्षा.....


दोस्तों परमसम्माननीय और आदरणीय विश्वविख्यात योग गुरु बाबा रामदेव जो कि इस देश को सुधारने के लिए अत्याधिक प्रयत्नशील हैं, उनका यह प्रयास सराहनीय है।

मेरा मानना है कि देश में आवश्यक बदलाव लाने के लिए या सुधार लाने के लिए राजनीति ही सिर्फ एकमात्र जरिया नहीं है, वे योग गुरु रहकर भी सुधार ला सकते हैं..... आज देश ही नहीं पूरे विश्व में उनके लाखों अनुयायी हैं, जो उनके द्वारा सिखाई जा रही इस देश की प्राचीन पद्धति योग को अपनाकर अपना शारीरिक और मानसिक विकास करते हुए, निरोगी रहकर अपनी जीवन शैली को उन्नत कर रहे हैं.......! ऐसे में योग गुरु बाबा का अपनी पार्टी बनाकर राजनीति में आना उनका pre planned और वास्तविक उद्धेश्य नजर आता है जो कहीं न कहीं उनके कद को छोटा कर रहा है। जिस विद्या के माध्यम से उन्होंने इतनी ख्याति अर्जित की है वो सिर्फ राजनीति में आने के लिए ही की है और अपने उद्धेश्य को छिपाकर बाबा ने देश और विश्व के साथ छल किया है.......

बाबा को ये सब शोभा नहीं देता कि वे अपनी विद्या और ख्याति का इस प्रकार से दुरूपयोग करें और अपने अनुयाइयों का स्वयं की स्वार्थ सिद्धि हेतु प्रयोग करें। उनका काम तो योग सिखाना है और वे इसे करते रहें ताकि उनका सम्मान पूरे विश्व में और देश में बना रहे.......

राजनीति में ही आना था तो इतना ढोंग करने की आवश्यकता थी ही नहीं। सीधा सा अपना विधानसभा क्षेत्र या लोकसभा क्षेत्र चुनते, वहां विकास का काम करते और विधानसभा या लोकसभा में निर्वाचित होकर पहुँच जाते। लेकिन मुझे लगता है उनकी महत्वाकान्क्षाएं यहीं तक सीमित न होकर इससे भी कहीं बहुत ज्यादा हैं, शायद वो इस देश का प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे हैं....!

मैं ये कहना चाहते हूँ कि राजनीति बाबाओं के और गुरुओं के लिए नहीं बनी है क्यूंकि अगर ऐसा होता तो जगत गुरु शंकराचार्य जी, रविशंकर जी, आसाराम बापू जी, आशुतोष महाराज जी, अम्मा और भी ऐसे धर्मगुरुओं और बाबाओं के बहुत सारे नाम हैं जो कि सरकार में मंत्री रहकर अपनी भूमिका निभा रहे होते......, लेकिन ऐसा नहीं है और साथ ही उपरोक्त सभी लोग ऐसा करना भी नहीं चाहते क्योंकि इन सभी की सोच देश में सही शिक्षा देते हुए और एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए समाज और देश में सुधार को गति प्रदान करना है।

इतिहास गवाह है कि गुरुओं ने स्वयं कभी राजनीति नहीं की उन्होंने सिर्फ मार्गदर्शक का काम किया है और इसीलिए वो आज भी माने और पूजे जाते हैं। बाबा को भी योग ही करना चाहिए और योग ही सिखाना चाहिए....

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