Friday, December 24, 2010

आदमी व्यवहार में आदिम ही दिखता है अभी, यूँ तो है दुनिया सभी आदिम प्रथाओं के ख़िलाफ़...



राजस्थान पिछले तीन दिनों से गुर्जर आन्दोलन की आग में धधक रहा है। प्रदेशवासी डरे और सहमे हुए से हैं कि अब क्या होगा........? उनके जहन में पिछले आन्दोलन की याद ताज़ा हो जाती है, जिसमें कि गोलियां चल गई थीं और लगभग दो दर्जन युवक हताहत भी हो गए थे साथ ही भारी मात्रा में सरकारी और निजी संपत्ति का क्षय हुआ था..........

आन्दोलन करना एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और अपनी मांगें मनवाने का एक तरीका है, लेकिन आन्दोलन करने के साथ-साथ ही सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आन्दोलन से आम जन प्रभावित न हो और उद्धेश्यपूर्ति हेतु जिस भी व्यवस्था का ध्यान आकृष्ट करना है, चाहे वो व्यवस्थापिका हो, कार्यपालिका हो या फिर न्यायपालिका हो, वहीं तक सीमित रहे।

बड़े दुःख की बात है कि अपनी मांगे मनवाने के लिए हमारे साथी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि रेलवे ट्रेक रोकने से, राष्ट्रीय राजमार्गों को रोकने से, बाजारों को बंद करवाने से और स्कूलों, चिकित्सालयों आदि सरकारी संस्थानों को बंद करवाने से कोई फलदायक नतीजा नहीं आएगा, बल्कि आम जन में जाति विशेष के लिए रोष उत्पन्न हो जाएगा............... आन्दोलनकारियों को यह सोचना चाहिए कि ऐसा सब करने से आम जनता कितनी ज्यादा प्रभावित हो रही है.........! अपना नियमित जीवन भी नहीं जी पा रही है और ये स्वयं भी उसी समाज का हिस्सा हैं, जिसमें बाकी के लोग भी रहते हैं, कहीं ऐसा न हो की आने वाले भविष्य में समाज के अन्य वर्ग इनके साथ सामाजिक सामंजस्य नहीं बिठा पाएं..............!

आन्दोलनकारियों और नेतृत्वकर्ताओं से आम जन यह जानना चाहता है कि........

रेलवे ट्रेक रोकना कहाँ तक उचित है........?
राजमार्गों को रोकना कहाँ तक उचित है.......?
आवागमन के और यातायात के साधनों को रोकना कहाँ तक उचित है.......?
सरकारी संपत्ति, जो कि हमारे ही पैसे से बनी है को नुकसान पहुचाना कहाँ तक उचित है........?
आम आदमी की दिनचर्या को रोक देना कहाँ तक उचित है........?
युवा छात्र-छात्राएं, जो कि दिन-रात मेहनत करके भविष्य निर्माण में लगे हुए है, उनका इस वजह से परीक्षाएं नहीं दे पाना कहाँ तक उचित है.........?


ऐसे और भी बहुत सारे सवाल हैं, जिनका जवाब आम जनता चाहती है और कहती है कि आप भी तो हमारे ही साथी हो........!

मेरी आन्दोलनकारी और नेतृत्वकर्ताओं से करबद्ध गुजारिश है कि हम समाज के बाकी सभी लोग उनके साथी हैं और चाहते हैं कि उनकी जायज मांग पूरी हो, जिसे कि क़ानून और सरकार मान्यता दे किन्तु हमें होने वाली परेशानियों का भी ध्यान रखा जाए......

जय हिंद.....
जय भारत.....




4 comments:

  1. http://www.rajasthanpatrika.com/news/home-page/12252010/jaipur/97022
    http://www.rajasthanpatrika.com/news/Jaipur/12252010/jaipur/96927
    http://www.rajasthanpatrika.com/news/Jaipur/12252010/jaipur/96938
    दोस्तों ऊपर दिए गए लिंक्स को पढ़कर और वास्तविक स्थिति को जानकर, आप सब ये बताएं कि हम, आप और ये आम जन क्यूँ ये सब कुछ सहन करें..........? जब इनकी समस्या का समाधान हमारे हाथ में नहीं है और इनके ऐसा करने से सबसे ज्यादा परेशानी का सामना हमें करना पड़ रहा है, तो क्या ये हमारा फर्ज नहीं है कि हम सभी एकजुट होकर इस सब को रोकने का प्रयत्न करें........?

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  2. आज इस आन्दोलन को फैले 6 दिन पूरे हो चुके हैं और अभी तक इसका कोई सकारात्मक हल नजर नहीं आ रहा है, आम जन बेहद दुखी और परेशान है पर मजबूर क्यों है, ये समझ नहीं आ रहा है........!
    आन्दोलन के चलते अभी तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 200 करोड़ रूपये का नुकसान हो चुका है और देश में राजस्थान की साख निरंतर गिरती जा रही है............जहां तक मेरी जानकारी है राजस्थान में गुर्जर आन्दोलन ही एकमात्र ऐसा उदाहरण है, जिसने बिना किसी प्राक्रतिक आपदा के 5-5, 6-6 दिन रेल यातायात को ठप्प कर दिया गया हो..... साथ में दिए गए लिंक पर भी गौर फरमाएं......
    http://www.bhaskar.com/article/RAJ-JAI-industries-of-the-day-30-million-loss-1691621.html?HT2=
    http://www.rajasthanpatrika.com/news/Jaipur/12262010/jaipur/97398
    http://www.rajasthanpatrika.com/news/Jaipur/12262010/jaipur/97396

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  3. प्रदेश में गुर्जर आन्दोलन को चलते हुए आज दसवां दिन है। प्रदेश और देश की आम जनता की तारीफ़ करते हुए उसे बधाई देना चाहता हूँ कि हमारे जितनी सहनशीलता का उदाहरण शायद ही कहीं मिले जो अपने साथ लगातार पिछले 9 दिन से हो रही परेशानी चुपचाप सहन किये जा रही है, चाहे वो रेल यातायात या सड़क मार्ग के अवरुद्ध होने कि वजह से कहीं फंसा हो, चाहे उसे रोजमर्रा की जरूरत का समान नहीं मिल रहा हो और चाहे इनकी वजह से उनके बच्चों के भविष्य पर असर पड़ा रहा हो, फिर भी चुपचाप सहन किये जा रहा है...... धन्य है आम जनता और उसकी सोच....! प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 200 करोड़ का नुकसान हो रहा है, फिर भी हम मस्त हैं.....!
    आप सभी से यह जानना चाहता हूँ कि हमारी ऐसी कौनसी मजबूरी है, जो हम ये सब सहन कर रहे हैं या फिर हमारी आदत ही बन चुकी है कि हम दूसरों के सहारे समाधान ढूँढने कि कोशिश करते हैं।
    हम कब जागेंगे......?
    कब हम जन हित में अपना हित ढूँढेंगे......?
    कब खुद पहल करना सीखेंगे.......?
    साथियो अब यह जरूरी हो गया है कि हम सबसे पहले अपनी जिम्मेदारी समझें और खुद पहल करें क्योंकि मेरा मानना है कि दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसमें आम जनता शामिल हो और उसका हल न निकले.....आन्दोलनकारी हमारे ही साथी और हमारे ही भाई हैं और हमारी परेशानियां जरूर समझेंगे....
    जय हिंद.......

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  4. प्रदेश में पिछले 17 दिनों से चल रहा गुर्जर आन्दोलन आज समाप्त हो गया है , उम्मीद है कि प्रदेश में जन जीवन अब जल्द ही सामान्य हो जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्य सरकार को बहुत-बहुत बधाई कि उन्होंने संयम से काम लेते हुए बिना लाठी और गोली चलाए, बिना बल प्रयोग किए शान्ति पूर्ण तरीके से वार्ता के माध्यम से आन्दोलन को समाप्त करवाया.....

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