Sunday, October 10, 2010

लोकतंत्र और हमारी जिम्मेदारी......


विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत, जिसके हम निवासी हैं...........। लोकतंत्र का अभिप्राय..... "जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा" शासन होता है।

साथियो जब इस देश में व्यवस्था हमारी है, हमारे लिए है और हमारे ही लोगों द्वारा बनाई गई है तब भी क्यों हम छोटी से लेकर बड़ी कमियों के लिए किसी व्यक्ति विशेष, किसी सरकार विशेष या किसी व्यवस्था विशेष पर आरोप लगाते हैं.....? अगर हम व्यवस्था में विद्यमान कार्यप्रणाली, व्यवस्थापिका और सरकार से किसी भी विषय या मुद्दे पर नाराज हैं तो क्या हमें उसका ढीढोरा पीटने के बजाय उसमें परिवर्तन और सुधार लाने के लिए प्रयास नहीं करना चाहिए.....?

आज आप और हम भ्रष्टाचार का सबसे ज्यादा ढीढोरा पीटते हैं तो क्या उसके लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं.....?

अपनी सुविधा के लिए हम किसी की भी मांग को पूरा करने के लिए क्यों तैयार हो जाते हैं.....?

क्या हम लाइन में लगके काम नहीं करवा सकते...?

क्या हम निर्धारित नियमो के दायरे में रहकर काम नहीं कर सकते...?

क्या हम जहा सरकार भेजे वहा जाके नौकरी नहीं कर सकते....?

लेकिन नहीं, हम बस अपनी सुविधा देखते हैं और भ्रष्टाचार का रोना रोते रहते हैं.....हर समस्या का समाधान हम स्वयम हैं....इस देश के क़ानून के मुताबिक़ अपराध करने वाला और उसका साथ देने वाला दोनों बराबर के दोषी माने जाते हैं तो फिर क्यों हम दूसरे को ही दोषी कहते हैं........? रिश्वत लेना अगर अपराध है तो देने वाला भी तो अपराधी हुआ। जब इन कार्यों के लिए हम भी जिम्मेदार हैं तो क्या किसी को दोष दिया जाना उचित है.......?

मेरा मानना है की हम सबको मिलकर कमियों को गिनाने के बजाय उन्हें दूर करना चाहिए ताकि हमारी भूमिका और जिम्मेदारी का वास्तविक रूप से निर्वहन हो सके।

परिवर्तन चाहने के लिए दृढ इच्छाशक्ति का होना बहुत जरूरी है। इसके बिना हम सिर्फ बातें ही कर सकते हैं,परिवर्तन ला नहीं सकते। देश का इतिहास गवाह है की अगर चन्द लोगों ने दृढ इच्छाशक्ति से आजादी की ख्वाहिश नहीं जाहिर की होती और उसके लिए कदम न बढाए होते तो आज तक हम गुलाम भारत में रहकर यही बातें कर रहे होते की व्यवस्था खराब है,हम आजाद नहीं हैं,हम अपनी मर्जी से जी नहीं सकते इत्यादि, इत्यादि......

पाठकों यदि हम वास्तव में परिवर्तन चाहते हैं और सुधार चाहते हैं तो एकजुट होकर दृढ इच्छाशक्ति से व्यक्तिगत स्वार्थों को त्यागकर मिलजुलकर एक शुरुआत करें ताकि हम अपने सपनों के भारत का निर्माण कर सकें.....

आइये कदम बढाएं......

जय हिंद......


2 comments:

  1. Bilkul theek baat hai ! Hum mein iccha shakti ki hi kami hai. Kuchh to sarkar ki majboori hai. Sadhanon ki kami hai. Hamari sabse bari kami hai aniyantrit jansankhya. Doosri kami hai tel ke bhandar kum hona. Teesri kami hai krishi pradhan desh hone ke karan monsoon ki kami. Is baar ko chhor kar. Aur sabse bari kami hum mein thora swarthi pan ke doosre ka na sonchna. Varun Kaul

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  2. HMMMM !!!!!
    CORRUPTION !!!!!!
    BUHUT SAARI VAJAH HAI ISKI ??
    1) GOVT - JO IS MEIN SABSE ZYAADA INVOLVED HAI AUR
    JISSE SAB DPRMNTS , CHAAHE PRIVATE YAA
    KOI AUR SECTOR , SAB ISS MEIN AATE HAIN
    !!
    2) HUM LOG - JO ISKO SHURUU KARTE HAIN , CHAAHE
    APNE SWARTH KE LIYE LIYE HII SAI !!
    AUR ISS "CORRUPTION" KO ROKNE KAA SIRF EK HII
    TRIKAA HAI --------
    NAA KHAOO NAA KHILAO
    SIRF PILAOO !!!!
    KYAAAA ??????
    AREEEEEE TEAAAAAAAAAAAAA !!!!!
    AAPKO KYA LAGAAAAAA ????? HMMMMM

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