Tuesday, August 17, 2010

अपनी शक्ति से अनजान युवा......



मेरे देश का ये नौजवान इस तरह किस चीज के लिए गिडगिडा रहा है और क्यों......? और इसके साथ इस तरह क्यूँ पेश आया जा रहा है.......? क्या यह आतंकवादी है.......? क्या यह अपराधी है......? अगर नहीं है तो क्या कर रहा है मेरा ये युवा साथी......?

ऊपर लगी तस्वीरों में आप देख सकते हैं की मेरे देश का नौजवान साथी जो आने वाले समय में देश का निर्माता बनेगा उसे क्या हो गया है, क्यूँ अपनी इस शक्ति का दुरूपयोग कर रहा है.........? जब हम यह मानते हैं की पूरी दुनिया युवा शक्ति पर टिकी है चाहे वह आर्थिक क्षेत्र हो, सामरिक क्षेत्र हो, राजनीतिक क्षेत्र हो या सामाजिक क्षेत्र हो, फिर भी क्यों वह अपनी शक्ति का अहसास नहीं कर पा रहा है.........?

वैश्विक अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से युवा वर्ग पर टिकी है, प्रत्येक वस्तु का सबसे बड़ा उपभोक्ता युवा है, कोई भी नयी वस्तु हो उसे बाजार में लाते समय युवा वर्ग की पसंद नापसंद को ध्यान में रखा जाता है, अधिकाँश वस्तुओं को युवा ही बाजार उपलब्ध करवाता है...... सही मायने में वही बाजार का राजा है।

देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी युवा कंधो पर है, देश के लिए मर मिटने वालों में युवा ही सबसे आगे होते हैं।

देश का लगभग 60 फीसदी मतदाता युवा है। वही निर्धारित करता है की देश की बागडोर किसके हाथो में होगी। वह सरकार बनाने और गिराने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है तो फिर व्यवस्था में खामियों का दोष किन्हें व क्यों दिया जा रहा है......?

हमारे समाज में भी प्रत्येक सामाजिक गतिविधि का संचालन बुजुर्गों के अनुभवों को साथ लेकर भरपूर ऊर्जा के साथ युवा ही करता है।

इतना सबकुछ होने के बावजूद हमें आज भी अपनी युवा शक्ति का अहसास ही नहीं हुआ है, की हम क्या हैं, और क्या कर सकते हैं........! हम् में से अधिकांश का उद्धेश्य सिर्फ अच्छी नौकरी पाना, पूर्ण सुख सुविधाओं से भरपूर जीवन जीना और मौज मस्ती करना मात्र ही क्यों रह गया है.......? जिस व्यवस्था के हम खराब होने की बाते करते हैं, चर्चा करते हैं, शिकायतें करते हैं......! इतने शक्तिशाली होने के बावजूद क्या हम उन्हें बदलने का प्रयास तक नहीं कर सकते.....!

क्या हो गया है हमें, जब हम बाते कर सकते हैं, रैलियां निकाल सकते हैं, किसी के कहने में आकर धरना प्रदर्शन कर सकते हैं तो क्या हम एकजुट होकर इस व्यवस्था को बदलने के लिए दृढ़ता से कुछ नहीं कर सकते......? गलती हमारी ही है, जब हम हजारों की तादाद में इकठ्ठा होकर रैलियां निकालते हैं तो हम संयमित और नियंत्रित होकर अपने प्रयास को अंजाम तक नहीं पहुंचा सकते? सबसे ज्यादा जरुरी है हम नियंत्रण में रहकर अपनी बात कहें.

हमें एकजुट होकर, इकट्ठे होकर यह महसूस करवाना है की हम कितने शक्तिशाली हैं न की अनियंत्रित होकर हमारे साथ किसी को भी अपराधियों की तरह पेश आने की छूट देनी है, न ही किसी को ये मौका देना हे की कोई हमारी शक्ति को गाली दे, हमें हुडदंगी कहकर पुकारे और हमारे प्रयास को अराजकता फैलाने वाला करार दिया जाए।

आज हमारी शक्ति छोटे-छोटे अणुओं के रूप में विभाजित है, जिसे हमें मिलकर, एकजुट होकर परमाणु शक्ति के रूप में बदलना है, ताकि हम अपनी उस शक्ति का उपयोग देश के विकास में ले सकें और विश्व में सबसे बड़ी ताक़त बनकर उभरें.............

2 comments:

  1. I SUPPOSE THAT IT IS A GUD WAY OF ENCOURAGING
    THE YOUTH GROUP
    HOPE THIS THINKING HAS SOME , SAY 1/4TH EFFECT ON
    2DAY'S GENERATION
    KEEP UP THE THINKING
    TANUSHREE KAUL

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  2. Dear Tanushree u hv to keep up the thinking......

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