Friday, July 23, 2010

मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश.....


इन दिनों मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की चर्चा चल रही है। अब सामान्य सी बात है की जब परिवर्तन की बात हो रही है तो विरोध भी होगा, विरोध करने वाले कह रहे हैं इसे लागू कर देश के करोडो छोटे दूकानदार, किसान, और कारोबारियों के हक़ पर डाका डाला जा रहा है...

हम देखते आ रहे हैं की जब भी परम्परागत रूप से चली आ रही सोच में परिवर्तन की बात की जाती हैं तो इसी तरह विरोध के स्वर उठने लग जाते हैं। हम बेशक आधुनिक होते जा रहे हैं फिर भी परिवर्तन को स्वीकारने में परेशानी क्यों होती है उदाहरण के लिए एक सामान्य सी बात बताता हूँ जब कंप्यूटर का दौर शुरू होने जा रहा था तो सबने सुना होगा की अब तो ऐसी मशीन आ रही है जो 10 आदमियों का काम अकेले ही निपटा देगी, बाकि सबको काम से निकाल दिया जाएगा, इसकी वजह से हम बेरोजगार हो जाएंगे पर क्या आपको लगता है की ऐसा हुआ.......?


यदि मल्टी ब्रांड रिटेल में बड़ी विदेशी कम्पनियां निवेश करती हैं तो इसका मतलब ये थोड़े ही है की स्थानीय मौजूदा व्यवसाइयों को निकाल बाहर कर दिया जाएगा। ........... किसी नए निवेशक के आने से मौजूदा व्यवसाइयों को हानि होने की बात ही नहीं उठती है क्योंकि आने वाले निवेशक देश में अपने दुकानदार या व्यवसायी थोड़े ही साथ लेकर आते हैं.........! साथ आएगी तो एक व्यवस्थित प्रक्रिया, बेहतर सुविधाएँ, और उत्तम उत्पाद।


आप सब जानते हैं देश में पहले से ही कई विदेशी कंपनियों के आउटलेट्स स्टोर आदि हैं पर आपने वहा अपने ही देश के लोगो को काम करते हुए देखा होगा और साथ में हमें मिल रही हैं बेहतरीन सेवाएं और विश्वसनीय वस्तुएं .... इसी परिप्रेक्ष्य में मैं आपको एक बात बताता हूँ, अगर मौजूदा छोटे दुकानदार, या व्यवसायी उपभोक्ता की पसंद और वस्तु की गुणवत्ता का ध्यान रखते हैं तो उनके व्यवसाय को कोई हानि नहीं होती है, जैसे की जब देश में Reliance Fresh आया तो ठेले पर या परंपरागत रूप से सब्जी और फल बेचने वालों ने सोचा की जब इतना बड़ा व्यावसायिक घराना सुनियोजित तरीके से इस काम को करेगा तो हमारा व्यवसाय तो ख़त्म हो जाएगा, पर क्या ऐसा हुआ....? उसका एकमात्र कारण...... Reliance Fresh ने जो दावा किया की उनके फल और सब्जी सबसे ताजा मिलेंगे, उपभोक्ता को संतुष्ट नहीं कर सका और आज भी आप और हम फल और सब्जियां सब्जि मंडियों और ठेले से लेना पसंद करते हैं न की Reliance Fresh या इस तरह के उपलब्ध अन्य स्थानों से।

यहाँ सरकार को दोष देने का कोई औचत्य ही नहीं है, सरकार द्वारा विविध क्षेत्रों में पहले भी विदेशी निवेश स्वीकार किया जाता रहा है और यह आवश्यक भी है और जहाँ तक उपभोक्ता क्षेत्र की बात है तो सरकार को दोष दिया जाना हास्यास्पद लगता है क्योकि यह प्रतिस्पर्धा का दौर है, आज का उपभोक्ता बहुत विवेकशील है, उपभोक्ता बाजार का राजा है जो उसे उत्तम लगेगा बाजार का सिरमौर वही होगा। इस से उपभोक्ता को उच्च क्वालिटी की वस्तुएं उपलब्ध होंगी। आप सभी इस बात से भलिभांति परिचित हैं की वर्तमान में जीवन स्तर उन्नत हुआ है, एक आम उपभोक्ता की पसंद बदली है, अब उपभोक्ता बेहतरीन उत्पाद के लिए ज्यादा पैसा देने को भी तैयार है, उसे सबकुछ साफ़-स्वच्छ और विश्वसनीय चाहिए। इसके लिए जरुरी है की रिटेल का स्तर बढाया जाए उसमे यदि विदेशी निवेश से बात बनती दिख रही है तो परहेज कैसा.....?

यदि हमें बेहतर सुविधाएँ मिल सकती हैं तो हैं तो अन्य क्षेत्रों की तरह ही आने दीजिये विदेशी निवेश को अपने देश की रोजमर्रा की जरूरतों में, यह हमारे लिए ही तो है। हमें अपना दृष्टिकोण व्यापक करते हुए और परिवर्तनों का स्वागत करना चाहिए।

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