Monday, July 5, 2010

आज भारत बंद, कल से होगी मंहगाई कम......!



यह सच है की मंहगाई दिन प्रतिदिन बढती जा रही है, हर चीज के दाम आसमान छूने लगे हैं। लेकिन इसके लिए जिम्मेदार कौन है.................?

आप.......?
हम........?
सरकार......?
या फिर हम सभी.....?
मंहगाई की समस्या के समाधान के लिए भारत बंद एक कारगर उपाय है....! और कल से ही हमें सभी चीजें सस्ती मिलने लगेंगी....! क्या आप भी ऐसा ही सोचते हैं............?

मंहगाई से निपटने के लिए बंद के समर्थकों ने दलगत राजनीती से ऊपर उठकर मंहगाई कम करने के लिए कोई सकारात्मक संभावनाएं तलाशी होती तो कितना अच्छा होता..........

बंद से मंहगाई पर असर पड़े या न पड़े, इस से आप और हम किस कदर प्रभावित होते हैं यह हम से बेहतर कोई नहीं जान सकता। हर आदमी परेशान होता है, लोगो के काम अटक जाते हैं, फिर उस समय हम मंहगाई को नहीं, बल्कि बंद करने वालों को कोसते हैं.......!

इस बंद के बहाने आज देश में जो भी घटा है उस से आप सभी भलिभांति परिचित हैं और यदि नहीं भी हैं तो बंद के नाम पर आज हुए तमाशे से कल सवेरे अखबार के माध्यम से परिचित हो जाएंगे। इन उपद्रवों के बीच मुख्य मुद्दा तो गायब हो गया और उत्पाती एवं उपद्रवी लोगो के वारे-न्यारे हुए हैं। उन्हें मौका मिल गया जोर-जबरदस्ती करने का, बाजार, संस्थान आदि को बंद करवाने का, आवागमन के साधनो को रोकने का, लोगों के साथ अभद्र व्यवहार करने का, आप ही बताइये क्या ये तरीका सही था...........?

आप और हम यदि सरकारें बनाते और गिराते हैं तो फिर चन्द लोगो की इतनी हिम्मत कैसे हो जाती है की वे पूरे आम जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर देते हैं........? कब हम लोग एकजुट होंगे और ऐसे उत्पाती एवं उपद्रवी लोगो को अपनी दिनचर्या को थामने से रोकेंगे..............!

इस सबके विपरीत मंहगाई को रोकने के लिए सकारात्मक प्रयास भी किये जा सकते हैं। इस के लिए आवश्यक है की सरकार एवं विपक्ष निजी स्वार्थ को छोड़कर एकजुट हों एवं इस समस्या के समाधान के लिए स्वस्थ रननीति तैयार करें जिसके तहत देश आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो तथा मंहगाई कम हो सके।


14 comments:

  1. सही है सर जी पर आम आदमी तो बेचारा बीच का बंदर है - ये तो राजनीति का खेल है (एक दुसरे से विरोध का दिखावा करो और अपनी-अपनी जेबे भरो )

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  2. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  3. "इस के लिए आवश्यक है की सरकार एवं विपक्ष निजी स्वार्थ को छोड़कर एकजुट हों एवं इस समस्या के समाधान के लिए स्वस्थ रननीति तैयार करें जिसके तहत देश आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो तथा मंहगाई कम हो सके"

    समसामयिक तथा प्रेरक आलेख

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  4. महंगाई से त्रस्त जनता को जागरूक करने के लिए कभी कभी उन्हें तकलीफ भी देना जरूरी है और फिर बंद तो आंदोलन का शांतिपूर्ण हथियार है... बंद के नाम पर जोर जबरदस्ती और उपद्रव की आलोचना होनी चाहिए, बंद की नहीं
    --
    चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. हिंदी ब्लागिंग को आप नई ऊंचाई तक पहुंचाएं, यही कामना है....
    इंटरनेट के जरिए घर बैठे अतिरिक्त आमदनी के इच्छुक ब्लागर कृपया यहां पधारें-
    http://gharkibaaten.blogspot.com

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  5. उच्च विचार
    http://navin-dewangan.blogspot.com/

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  6. Bandh se samasyaaen badti hain. Koshish to rajnetaon ki yaha hoti hai ki message jaye ki vipaksh is mudde par ek hai. Par sirf aam aadmi pareshan hota hai. Sarkar ko chaahiye ki waha public ko samjhaye ki waha kya kar rahi hai aur kyon safal nahin ho rahi hai. Ek jawab dari sarkar par banti hai. Kyonki yehe public ki chuni hui sarkar hai. Kyoki prices se vote dene walj public pareshan hai. Hamari public economics na to samajti hai aur na usko iccha hai samajhne ki.Dr.Varun Kaul

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  7. सही कहा आपने। ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है।
    http://khas-khabar.blogspot.com/

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  8. तलाश जिन्दा लोगों की ! मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!
    काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
    =0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=

    सागर की तलाश में हम सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

    ऐसे जिन्दा लोगों की तलाश हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

    इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

    अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

    आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

    शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

    सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! अब हम स्वयं से पूछें कि-हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

    जो भी व्यक्ति इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-

    (सीधे नहीं जुड़ सकने वाले मित्रजन भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से बचाव तथा निवारण हेतु उपयोगी कानूनी जानकारी/सुझाव भेज कर सहयोग कर सकते हैं)

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
    राष्ट्रीय अध्यक्ष
    भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
    7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
    फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666
    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in
    ---------------
    http://presspalika.blogspot.com/

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  9. अब कर भी क्या सकते है....जो सरकारें केंद्र में आती है उनके लिए हिंसक प्रदर्शन ही एक मात्र रास्ता र ह जाता है क्योकि उसके अलावा वो किसी चीज़ को अहमियत नहीं देते हैं

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  10. हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  11. i agreed, kash apki is koshish se un logo ko samaj aye jo ein faltu kamo ki wajah se sadaran janta ko pareshan karte hai........

    par kya aisa kabi sudhar payega? hope so......
    par aap apni koshish barkarar rakhiye

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  12. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
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